दोस्तों 

पिछले 5 साल पहले मुझे राजस्थान के एक जिले मे जाने का मौका मिला मैने देखा वहा के लोगो मे प्रेम अपनापन विशेष तौर से मेहमानों का स्वागत कैसे किया जाता हे?हमारे लिये वहा के लोग नये थे पर उनके लिये शायद हम नये नही थे !

वहा के लोगो ने हमे रात भर उनके घर पर रखा हमारी बहुत मेहमान नवाजी की हमे ऐसा लगने ही नही दिया कि हम पराये है!दूसरे दिन भी हमे रुकने और मान मनवार के लिये कहा पर हमे भी समय पर घर आना था!हमने वहां से जाने की आज्ञा ली तो उन लोगो ने हमें हमारी गाड़ी तक छोड़ने आये जैसे अपना कोई बाहर शहर जा रहा हो उन लोगो के द्वारा दिया गया अथाह प्रेम और आदर से मै इतना अभिभूत हो गया कि मुझे लगा कि ये मेरे ही रिस्तेदार है!और मैं उनसे ही मिलने आया था!

वहा के बड़े,बच्चे और बुजुर्ग सभी लोगों के अतिथि देवों भव: व्यवहार को देखकर लगा कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति अभी जिन्दा हे जो दूसरे देशो में देखने को नही मिलती! 

परन्तु पिछले साल मुझे वापस वहां पर जाने का मौका मिला तो देखा कि जो प्रेम,आदर और मेहमान नवाजी पहले थी वह अब देखने को नही मिली!लोग अपने अपने काम मे व्यस्त थे उनकों हमसे बात करने का भी समय नही था 

मैने एक बुजुर्ग से कहा कि हमे एक दिन के लिये यहा रुकना हे!क्या आप हमे आश्रय देंगे? तो उस बुजुर्ग ने कहा आप यहा पर नये हो हम आपको यहा पर आश्रय नही दे सकतें क्यो कि अभी समय बहुत खराब है! ऐसे जवाब से मै मन ही मन दंग रह गया सोचा क्या यह वही जगह हे जहा के लोगो में प्रेम और अपनापन होता था जिसका मै कायल था अब ऐसा क्या हो गया? जगह वही हे इन्सान वही हे फिर बदला क्या हे? बदला हे तो सिर्फ समय!

 दोस्तों में मानता हु कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है! समय के साथ अपनी सोच को भी बदलना चाहिए लेकिन अपने आचरण,व्यवहार और संस्कृति को नही! क्यो कि यह एक भारतीय होने की पहचान है!